यूनिवर्सिटी ऑफ़ ग्रीनविच में फायर सेफ्टी इंजीनियरिंग ग्रुप के निदेशक प्रोफ़ेसर एड गैलिया कहते हैं, “मैंने जितने भी वीडियो देखे, उनमें मैंने ग्राउंड पर एक भी यात्री को अपना सामान साथ लिए नहीं देखा. अगर लोग अपना केबिन लग्गेज लेने की कोशिश करते ये ख़तरनाक हो सकता था क्योंकि इससे विमान से यात्रियों को निकालने की प्रक्रिया धीमी हो जाती.”
प्रोफ़ेसर एड गैलिया कहते हैं, “दुर्घटनाग्रस्त हुए विमान एयरबस 350 की स्थिति ने भी इवैकुएशन (यात्रियों को निकालने की प्रक्रिया) को मुश्किल बना दिया. ये दुर्घटना वैसी नहीं थी, जिसके बारे में पहले से कल्पना की जा सकती थी. विमान का अगला हिस्सा नीचे की ओर झुक गया था जिसका मतलब था कि यात्रियों का दूसरी तरफ़ बढ़ना मुश्किल था.”
इस सूरत में केवल तीन आपातकालीन दरवाज़े खोले जा सकते थे. यात्रियों को निकालने के लिए लगाए गए इन्फ्लैटेबल स्लाइड्स विमान के आगे झुके होने की वजह से ठीक से नहीं लगाए जा सके थे. ये स्लाइड बहुत ढलान पर था जो यात्रियों के लिए खतरनाक हो सकता था.
जापान एयरलाइंस ने बताया कि इवैकुएशन ड्राइव के दौरान विमान का अनाउंसमेंट सिस्टम ख़राब हो गया था. इस वजह से फ्लाइट के क्रू को मेगाफोन पर तेज़ आवाज़ में यात्रियों को निर्देश देना पड़ा.
एक यात्री को थोड़ी चोट आई थी जबकि 13 यात्रियों ने दर्द और अन्य शारीरिक तकलीफ़ों को लेकर मेडिकल मदद मांगी.
जापान एयरलाइंस का ये विमान न्यू चितोजे एयरपोर्ट से स्थानीय समयानुसार शाम चार बजे रवाना हुआ था और शाम के छह बजे हनेदा एयरपोर्ट पर उसकी लैंडिंग हुई.
इससे टकराने वाला कोस्ट गार्ड का विमान नए साल पर आए भूकंप के पीड़ितों के लिए सहायता सामाग्री लेकर आया था.
इस घटना की जांच की जा रही है.